शिमला, 19 सितंबर। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) ने शोध, नवाचार और बौद्धिक संपदा को बढ़ावा देने के लिए चालू शैक्षणिक सत्र में 50 पेटेंट हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। विश्वविद्यालय पात्र पेटेंट आवेदनों के लिए दाखिल करने और प्रक्रिया से संबंधित पूरा खर्च भी वहन करेगा। प्रत्येक पेटेंट पर करीब 35 से 40 हजार रुपये का खर्च आने का अनुमान है। यह घोषणा कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने आई.पी.आर. सेल की ओर से आयोजित कार्यशाला ‘आइडिया से पेटेंट तक’ में की।
कुलपति ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार समय की आवश्यकता बन चुके हैं। विश्वविद्यालयों की पहचान अब केवल शैक्षणिक कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि शोध, नवाचार, पेटेंट और ज्ञान एवं तकनीक के विकास में योगदान से भी होती है। उन्होंने विभागाध्यक्षों, शिक्षकों और शोधार्थियों से सामूहिक एवं अंतरविषयक तरीके से कार्य करने और अपने शोध में पेटेंट की संभावनाएं तलाशने का आह्वान किया।
प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि शोधार्थियों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए विश्वविद्यालय पीएम-यूएसएचए निधि के तहत पेटेंट दाखिल करने और प्रसंस्करण का खर्च उठाएगा। उन्होंने शोधकर्ताओं से केवल शोध पत्र प्रकाशित करने तक सीमित न रहने और शोध परिणामों को पेटेंट के माध्यम से संरक्षित करने की संभावनाएं तलाशने को कहा।
आईपीआर सेल के प्रमुख डॉ. रमेश चंद ठाकुर ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य शोधकर्ताओं को विचार से पेटेंट तक की प्रक्रिया की जानकारी देना है। उन्होंने पेटेंट योग्य शोध को सार्वजनिक करने से पहले संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए ‘नवाचार करें, संरक्षण करें, प्रकाशित करें’ का संदेश दिया।
उन्होंने बताया कि एचपीयू ने Ennoble IP Consultancy Private Limited के साथ समझौता ज्ञापन किया है। कंपनी पेटेंट ड्राफ्टिंग, पूर्व-कला खोज, फाइलिंग और अन्य प्रक्रियाओं में विशेषज्ञ सहयोग देगी।
कार्यशाला में कंपनी के कुशल जुनेजा और आशुतोष राणा ने पेटेंट की पात्रता, पूर्व-कला खोज, ड्राफ्टिंग और फाइलिंग प्रक्रिया की जानकारी दी। इस अवसर पर डीन ऑफ स्टडीज प्रो. बीके शिवराम सहित विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी और आईपीआर सेल के सदस्य उपस्थित रहे।
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