शिमला, 10 सितंबर। शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कर 26 साल बाद कांग्रेस के प्रभाव वाले जिला परिषद में बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया है। चंदलोग-नेरूवा वार्ड से निर्वाचित भूपेंद्र सिंह सिसोदिया अध्यक्ष और टिक्कर वार्ड से निर्वाचित भरत सिंह कलांटा उपाध्यक्ष चुने गए।
अध्यक्ष पद के चुनाव में सिसोदिया को 13 मत मिले, जबकि कांग्रेस समर्थित सुरेंद्र रेटका को 10 मत प्राप्त हुए। दो मत निरस्त हुए। उपाध्यक्ष पद पर भरत सिंह कलांटा को 14 और कांग्रेस समर्थित मीनाक्षी को 10 मत मिले, जबकि एक मत निरस्त हुआ।
भाजपा ने इस जीत को प्रदेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों का संकेत बताया है। राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने कहा कि 12 में से 11 जिला परिषदों में भाजपा का प्रभाव स्थापित होना बड़ा राजनीतिक संदेश है। उन्होंने कहा कि शिमला जैसे जिले में, जहां कांग्रेस सरकार से जुड़े कई प्रभावशाली नेता और मंत्री आते हैं, वहां जिला परिषद के दोनों शीर्ष पदों पर कांग्रेस की हार जनता के मूड को दर्शाती है।
महाजन ने आरोप लगाया कि सरकार के प्रति कर्मचारियों, युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अब जिला परिषद में सभी सदस्य राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जिले के विकास और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए काम करें।
राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने भाजपा की जीत को लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा कि 102 दिनों के इंतजार के बाद जिला परिषद को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष मिले और दोनों पदों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार विजयी हुए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस खेमे से भी भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान हुआ, जो कांग्रेस के भीतर निराशा का संकेत है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि 26 साल बाद शिमला जिला परिषद के दोनों शीर्ष पदों पर पार्टी समर्थित उम्मीदवारों की जीत जिले के राजनीतिक समीकरणों में बदलाव का संकेत है। पार्टी ने इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के पक्ष में बन रहे माहौल से जोड़ते हुए दावा किया कि बदलाव की शुरुआत जमीनी स्तर से हो चुकी है।
जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और नवनिर्वाचित अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह सिसोदिया तथा उपाध्यक्ष भरत सिंह कलांटा को बधाई दी।
