शिमला, 9 सितम्बर। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह और केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू से भेंट कर हिमाचल प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। बैठकों में विशेष रूप से दूरदराज एवं जनजातीय क्षेत्रों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विस्तार तथा प्रदेश में हवाई संपर्क और विमानन अवसंरचना को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने डॉ. जितेंद्र सिंह के समक्ष लाहौल-स्पीति और पांगी के उच्च ऊंचाई वाले जनजातीय क्षेत्रों में लद्दाख के हानले की तर्ज पर खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों की अनुकूल खगोलीय परिस्थितियों का उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान और अवलोकन के लिए किया जा सकता है। प्रस्तावित केंद्र से स्थानीय युवाओं एवं विद्यार्थियों में खगोल विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ने के साथ-साथ ज्ञान आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में हिमाचल में लैवेंडर की खेती को बढ़ावा देने के लिए सीएसआईआर के माध्यम से डेमोंस्ट्रेशन साइट्स का विस्तार करने, आकांक्षी विकासखंडों के स्कूलों में विज्ञान संग्रहालय स्थापित करने तथा प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्वचालित वर्षामापी और विकासखंड स्तर पर स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित करने के लिए केंद्रीय सहयोग का आग्रह किया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इन प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।
वहीं, केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार का मामला प्राथमिकता से उठाया। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। केंद्रीय मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार की टेक्नो-इकोनॉमिक फीजिबिलिटी रिपोर्ट दो माह के भीतर अंतिम रूप देने, सक्षम सलाहकार नियुक्त करने और निर्धारित समय में रिपोर्ट तैयार करवाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण से परियोजना की लागत का यथार्थपरक आकलन करने का भी आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में हेलीपोर्ट नेटवर्क को मजबूत करने के लिए केंद्र से सहयोग मांगा। केंद्रीय मंत्री ने उड़ान योजना के तहत हिमाचल में हेलीपोर्ट निर्माण के लिए वित्तीय सहायता देने पर सहमति जताई। शिमला एयरपोर्ट से नियमित उड़ानों के संचालन और रनवे की क्षमता के अनुरूप उपयुक्त विमानों के संचालन की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कांगड़ा एयरपोर्ट की तर्ज पर शिमला एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था सीआईएसएफ के स्थान पर हिमाचल प्रदेश पुलिस को सौंपने का आग्रह किया, जिस पर केंद्रीय मंत्रालय ने सहमति व्यक्त की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा आधुनिक विमानन सुविधाओं के माध्यम से हिमाचल के दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा एयरपोर्ट का विस्तार, शिमला से नियमित हवाई संपर्क और हेलीपोर्ट नेटवर्क का विस्तार पर्यटन के साथ-साथ प्रदेश के लोगों को भी बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध करवाएगा।
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