इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी), शिमला में नेत्र रोग विभाग और स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो), हिमाचल प्रदेश की ओर से नेत्रदान पखवाड़े के समापन अवसर पर नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को नेत्रदान के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए समाज में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।
नेत्र रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. राम लाल शर्मा ने ओपीडी के बाहर उपस्थित मरीजों एवं तीमारदारों को संबोधित करते हुए नेत्रदान के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद किया गया नेत्रदान दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाने का माध्यम बन सकता है। इसलिए लोगों को नेत्रदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।
डॉ. राम लाल शर्मा ने लोगों को नेत्रदान की प्रक्रिया, कॉर्निया प्रत्यारोपण तथा नेत्रदान से संबंधित भ्रांतियों के बारे में भी जागरूक किया। उन्होंने कहा कि जागरूकता की कमी और समाज में व्याप्त विभिन्न मिथकों के कारण कई लोग इच्छा होने के बावजूद नेत्रदान के लिए आगे नहीं आ पाते। ऐसे में सही एवं वैज्ञानिक जानकारी लोगों तक पहुंचाना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि नेत्रदान एक ऐसा मानवीय कार्य है, जिसके माध्यम से मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद के जीवन में उजाला किया जा सकता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से नेत्रदान के संदेश को अपने परिवार, रिश्तेदारों और समाज के अन्य लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सोटो हिमाचल प्रदेश की ओर से भी अंग एवं ऊतकदान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। बताया गया कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को नेत्रदान की सही जानकारी उपलब्ध करवाने के साथ समाज में स्वैच्छिक अंग एवं ऊतकदान की भावना को मजबूत करना है।
समापन अवसर पर लोगों से अपील की गई कि वे नेत्रदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों से दूर रहें और इस पुनीत कार्य के प्रति दूसरों को भी जागरूक करें।
उन्होंने कहा कि नेत्रदान से किसी के जीवन का अंधकार दूर कर उसे नई रोशनी दी जा सकती है। समाज की सक्रिय भागीदारी और जागरूकता से ही नेत्रदान की मुहिम को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।
