शिमला, 19 सितंबर। भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना को एसजेवीएनएल से 800 करोड़ रुपये देकर वापस लेने की घोषणा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार से परियोजना के हस्तांतरण की शर्तों और प्रस्तावित राशि का आधार सार्वजनिक करने की मांग की।

जमवाल ने कहा कि ब्यास नदी पर हमीरपुर और कांगड़ा जिलों में स्थित 66 मेगावाट की धौलासिद्ध परियोजना में 33-33 मेगावाट की दो इकाइयां प्रस्तावित हैं। एसजेवीएनएल के अनुसार परियोजना से 90 प्रतिशत भरोसेमंद वर्ष में 304 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन की क्षमता है। केंद्र सरकार ने एक अक्टूबर 2020 को परियोजना के लिए 687.97 करोड़ रुपये की निवेश स्वीकृति दी थी।

जमवाल ने कहा कि केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की अक्टूबर 2025 की निगरानी रिपोर्ट में परियोजना की संशोधित लागत 1,561.21 करोड़ रुपये और संचयी व्यय 986.12 करोड़ रुपये दर्ज था। उस समय भौतिक प्रगति करीब 70 प्रतिशत थी और परियोजना की संशोधित पूर्णता समयसीमा मार्च 2027 निर्धारित की गई थी।

उन्होंने सवाल किया कि जब अक्टूबर 2025 तक 986 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके थे, तो 800 करोड़ रुपये की हस्तांतरण राशि किस आधार पर तय की गई है। उन्होंने पूछा कि क्या इसमें एसजेवीएनएल का निवेश, ऋण, ब्याज और अन्य वित्तीय देनदारियां शामिल हैं। साथ ही सरकार से मूल्यांकन रिपोर्ट और हस्तांतरण समझौता सार्वजनिक करने की मांग की।
जमवाल ने कहा कि परियोजना वापस लेने के बाद निर्माण पूरा करने में कितनी अतिरिक्त राशि लगेगी और उसका प्रबंध कैसे होगा, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से भविष्य के बिजली राजस्व, संचालन एवं रखरखाव लागत का आकलन सार्वजनिक करने को कहा।

उन्होंने कहा कि हिमाचल की जलविद्युत संपदा से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता जरूरी है। सरकार को धौलासिद्ध परियोजना से संबंधित वित्तीय दायित्व, एसजेवीएनएल से पत्राचार और संशोधित निर्माण समयसीमा सहित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए।

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