शिमला, 21 सितंबर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने किशाऊ बांध परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से हिमाचल के दीर्घकालिक जल अधिकारों और आर्थिक हितों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परियोजना का श्रेय ले रही है, जबकि इसके वित्तीय प्रावधानों और हिमाचल के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को जनता के सामने स्पष्ट नहीं किया गया है।
बिंदल ने कहा कि ₹15,624 करोड़ की परियोजना में ₹12,096 करोड़ जल घटक तथा ₹3,528 करोड़ विद्युत घटक के लिए निर्धारित हैं। उनके अनुसार जल घटक का खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाने की व्यवस्था परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में हिमाचल और उत्तराखंड के बीच विद्युत घटक की लागत 50-50 प्रतिशत वहन करने की सहमति बनी थी। इस आधार पर हिमाचल को ₹1,764 करोड़ का निवेश करना पड़ता। बिंदल ने सवाल उठाया कि यदि मुख्यमंत्री परियोजना से करीब ₹1,200 करोड़ सालाना आय का दावा कर रहे हैं तो राज्य ने विद्युत घटक में निवेश का विकल्प क्यों छोड़ा।
बिंदल ने हिमाचल के जल हिस्से को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पूर्व व्यवस्था में हिमाचल की हिस्सेदारी करीब 1.7 प्रतिशत थी, जो लगभग 50 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी के बराबर बताई गई थी। उन्होंने सरकार से नए समझौते में जल अधिकारों में हुए बदलाव और भविष्य में प्रदेश की सिंचाई एवं पेयजल जरूरतों की व्यवस्था स्पष्ट करने को कहा।
उन्होंने विशेष रूप से सिरमौर के किसानों की सिंचाई आवश्यकताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि परियोजना के संदर्भ में संभावित सिंचाई क्षेत्र, नहरों और कृषि पर प्रभाव की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण और स्थानीय कारोबारियों की भागीदारी की व्यवस्था भी स्पष्ट करने की मांग की।
बिंदल ने सरकार से किशाऊ परियोजना पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। इसमें केंद्र और राज्यों के वित्तीय योगदान, जल एवं बिजली हिस्सेदारी, अनुमानित आय, सिंचाई सुविधाओं, रोजगार और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास संबंधी प्रावधानों का विस्तृत विवरण देने को कहा। उन्होंने कहा कि भाजपा परियोजना के आगे बढ़ने का स्वागत करती है, लेकिन हिमाचल के दीर्घकालिक जल और आर्थिक हितों पर सरकार को जनता के सामने जवाब देना चाहिए।
