मुख्यमंत्री सुख के नाम पर शुल्क की सरकार चला रहे हैं। सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस ने बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन सरकार में आते ही जनता पर तरह-तरह के बोझ डालने का अभियान चलाया। दो बार वैट बढ़ाने के बाद अब पेट्रोल तथा डीजल पर 60 पैसे का सेस लगा दिया गया है।
अनाथ
अनाथ और विधवा सेस के नाम पर लोगों से पैसे वसूल कर सरकार चलाने की कोशिश हो रही है। हमने विधानसभा में कहा था कि पेट्रोलियम पर टैक्स का व्यापक प्रभाव पड़ता है। सभी चीजें महंगी हो जाती हैं। तो मुख्यमंत्री ने सदन में कहा था कि यह एक प्रावधान है, हम इसे लगाने नहीं जा रहे हैं। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी उनका दावा झूठा निकला।
हिमाचल प्रदेश पहाड़ी राज्य है, जहाँ पर यातायात और आपूर्ति व्यवस्था सड़क मार्ग पर ही निर्भर है। ऐसे में डीजल-पेट्रोल पर यह वृद्धि बुरी तरह से आम लोगों को प्रभावित करेगी।
सरकार की शुल्क लगाने की प्रवृत्ति पर माननीय उच्च न्यायालय ने भी टिप्पणी करते हुए सरकार के एक आदेश को रद्द करते हुए “कर लादने” में भी बुद्धिमत्ता और संवेदनशीलता दिखाने की नसीहत दी है। मुख्यमंत्री से आग्रह है कि सुख के नाम पर शुल्क की सरकार चलाना बंद करें।
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