शिमला/नई दिल्ली, 26 अगस्त। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में राज्य संचालित लॉटरी दोबारा शुरू करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर वित्त विभाग द्वारा जारी लॉटरी टेंडर तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दो दशक से अधिक समय से लॉटरी पर बनी राजनीतिक सहमति को किसी भी स्थिति में खत्म नहीं किया जाना चाहिए।
ठाकुर ने पत्र में ई-टेंडर 2026_DTAL_141511_1 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत ऑनलाइन और ऑफलाइन लॉटरी व्यवस्था के लिए सिंगल सेलिंग एजेंट नियुक्त करने का प्रस्ताव है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1999 में प्रेम कुमार धूमल सरकार ने लॉटरी पर प्रतिबंध लगाया था। वर्ष 2007 में तत्कालीन वीरभद्र सिंह सरकार ने भी लॉटरी की वापसी के बाद प्रतिबंध दोबारा लागू किया था। इसके बाद विभिन्न सरकारों ने भी इस व्यवस्था को बनाए रखा।
ठाकुर ने आशंका जताई कि ऑनलाइन लॉटरी के जरिए रोजाना 12 ड्रॉ और साल में तीन बंपर ड्रॉ प्रस्तावित हैं, जिससे जुआ सीधे लोगों के मोबाइल और घरों तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे अधिक असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ सकता है।
उन्होंने हिमाचल की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि राज्य का कर्ज वर्ष 2026 में करीब ₹1.10 लाख करोड़ पहुंच गया है और ऋण-जीडीपी अनुपात 42 प्रतिशत से अधिक है। उनके अनुसार लॉटरी से करीब ₹100 करोड़ सालाना आय का अनुमान है, जो वित्तीय संकट का स्थायी समाधान नहीं है।
ठाकुर ने GST अनुपालन मजबूत करने और डिजिटल एकीकरण के जरिए अतिरिक्त ₹250–350 करोड़ राजस्व जुटाने का सुझाव देते हुए मुख्यमंत्री से लॉटरी टेंडर रद्द करने की मांग की।
