दिल्ली, 7 अगस्त। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित हिमाचल एम्पोरियम का दौरा किया और स्थानीय स्तर पर निर्मित हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों की खरीदारी की। उन्होंने देशवासियों से भारतीय बुनकरों और शिल्पकारों के समर्थन में कम-से-कम एक हथकरघा उत्पाद खरीदने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने हथकरघा क्षेत्र से जुड़े सभी बुनकरों, शिल्पकारों और अन्य लोगों को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके कौशल, सृजनशीलता और समर्पण ने पीढ़ियों से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखा है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के शिल्पकारों की उत्कृष्ट कारीगरी की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक हथकरघा उत्पाद देश की समृद्ध परंपराओं, सांस्कृतिक विविधता और आत्मनिर्भरता की भावना को प्रतिबिंबित करता है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद केवल आर्थिक गतिविधि नहीं है, बल्कि इससे शिल्पकार परिवारों का सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा और महिला उद्यमियों को सहयोग मिलता है। साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करता है।
राज्यपाल ने 7 अगस्त के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1905 में इसी दिन स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी आंदोलन के आदर्श आज भी देश के विकास में प्रेरणा का स्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ केवल स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का अभियान नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय जनआंदोलन है। यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, सतत आजीविका के अवसर पैदा करने और पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल के प्रतिभाशाली बुनकर और शिल्पकार प्रदेश की विशिष्ट संस्कृति और पहचान से जुड़ी अमूल्य विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हथकरघा उत्पाद की प्रत्येक खरीद सांस्कृतिक विरासत और हजारों शिल्पकार परिवारों की आजीविका में महत्वपूर्ण निवेश है। उन्होंने लोगों से स्वदेशी शिल्पकला को गर्व के साथ अपनाने और इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
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