शिमला, 7 अगस्त। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर शोध के माध्यम से मरीजों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथम चरण में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी), शिमला में समर्पित शोध विभाग स्थापित किया जाएगा। इसके बाद इस व्यवस्था को प्रदेश के अन्य चिकित्सा महाविद्यालयों में भी लागू किया जाएगा। उन्होंने डायग्नोस्टिक सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर देते हुए मरीजों को एमआरआई, सीटी स्कैन और एक्स-रे जैसी जांच सुविधाएं बिना प्रतीक्षा के उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए।
उन्होंने अस्पतालों में ही रक्त जांच की सुविधा उपलब्ध करवाने को भी प्राथमिकता देने की बात कही। सरकार ने अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटीज चमियाना, आईजीएमसी शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज में स्वचालित प्रयोगशालाएं स्थापित करने के लिए 75 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इन प्रयोगशालाओं में एक ही रक्त नमूने से एक साथ कई प्रकार की जांच की जा सकेगी। आवश्यक मशीनों की खरीद के लिए निविदाएं जारी की जा चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य अधोसंरचना के उन्नयन के लिए धन की कोई कमी नहीं है। सरकार बेहतर गुणवत्ता और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दवाइयों की खरीद सीधे दवा निर्माण कंपनियों से करने पर भी विचार कर रही है। चिकित्सकों, चिकित्सा एवं पैरामेडिकल कर्मचारियों को बेहतर कार्य परिस्थितियां उपलब्ध करवाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालयों के शिक्षकों और चिकित्सकों से प्राप्त सुझावों को स्वास्थ्य सुधार प्रक्रिया में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री शीघ्र ही विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों का दौरा कर चिकित्सकों और शिक्षकों से संवाद करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों को राज्य के भीतर ही विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में विधायक कुलदीप राठौर, हरीश जनारथा, स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
