शिमला, 5 अगस्त। विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, जिला शिमला द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में तीन दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आशा कार्यकर्ताओं, धात्री माताओं तथा अन्य महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला शिमला डॉ. यशपाल रांटा ने की।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं में स्तनपान के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना है। उन्होंने बताया कि जन्म के तुरंत बाद नवजात को मां का पहला पीला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) अवश्य पिलाना चाहिए। इसे शिशु का पहला प्राकृतिक टीकाकरण माना जाता है, जो उसे संक्रमणों से बचाने के साथ-साथ उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। उन्होंने माताओं से जन्म के बाद पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने और दो वर्ष या उससे अधिक समय तक पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखने की सलाह दी।
जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रियंका ने कहा कि स्तनपान शिशु के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। मां का दूध शिशु के लिए संपूर्ण एवं सर्वोत्तम आहार है, जो आवश्यक पोषण प्रदान करने के साथ उसे विभिन्न बीमारियों से भी सुरक्षा देता है। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को स्तनपान के लाभों के बारे में जागरूक करने तथा उन्हें सही परामर्श देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में डॉ. अमन ने भी स्तनपान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नियमित स्तनपान से शिशु निमोनिया और अन्य संक्रमणों से सुरक्षित रहता है, जबकि माताओं में स्तन एवं अंडाशय के कैंसर का जोखिम भी कम होता है। कार्यक्रम के अंत में आशा कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में स्तनपान के प्रति व्यापक जनजागरूकता फैलाने तथा विश्व स्तनपान सप्ताह का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
