शिमला, 9 अगस्त। हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने 83.85 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है। इसके तहत आईजीएमसी शिमला, टांडा और नेरचौक समेत प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में अत्याधुनिक जांच एवं उपचार सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
आईजीएमसी शिमला में बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन सुविधा को सुदृढ़ करने के लिए स्पैक्ट मशीन और सेल सेपरेटर की खरीद के लिए 8 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। स्पैक्ट मशीन अंगों और ऊतकों की कार्यप्रणाली की थ्री-डी तस्वीरें तैयार कर विभिन्न रोगों की सटीक पहचान एवं मूल्यांकन में मदद करेगी। वहीं, सेल सेपरेटर के माध्यम से स्टेम सेल एकत्रित कर उन्हें ट्रांसप्लांटेशन के लिए तैयार किया जा सकेगा।
आईजीएमसी में छह अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीनों की खरीद और सीटीएल कंडाघाट के उन्नयन के लिए 14 करोड़ रुपये, जबकि दो एनालॉग एवं डिजिटल एक्स-रे मशीनों के लिए 3.50 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। संस्थान में 256-स्लाइस सीटी स्कैन मशीन की खरीद के लिए भी 12 करोड़ रुपये जारी हुए हैं।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा में छह हाई-एंड अल्ट्रासाउंड मशीनों के लिए 6 करोड़ रुपये दिए गए हैं। नेरचौक मेडिकल कॉलेज में पैट स्कैन भवन के निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं।
इसके अलावा सिविल अस्पताल ज्वालामुखी के लिए 17.95 करोड़, सिविल अस्पताल जोगिंदर नगर में चिकित्सकों और स्टाफ नर्सों के आवास के लिए 4.90 करोड़ तथा चिकित्सा महाविद्यालय जोलसप्पड़ में पार्किंग सुविधा के लिए 12 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। जोलसप्पड़ में पुलिस स्टेशन निर्माण के लिए 3.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेशवासियों को राज्य में ही आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना है, ताकि मरीजों को उपचार के लिए बाहर न जाना पड़े।
